इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...

आख़िरी बार मिलो

आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल राख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करें चाक-ए-वादा न सिले, ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिले साँस हमवार रहे, शमा की लौ...

वहाँ देखने को क्या था

मैं उन इलाक़ों में गया जहाँ मकान चुप थे उनके ख़ालीपन को धूप उजला रही थी हवा शान्त, मन्थर— अपने डैने चोंच से काढ़ने को बेचैन थी लोग जा चुके हैं उन्हें कुछ...

नदी

1 घर से निकलकर कभी न लौट पाने का दुःख समझने के लिए तुम्हें होना पड़ेगा एक नदी! 2 नदियों की निरन्तरता को बाँध उनका पड़ाव निर्धारित कर मनुष्य ने देखा है ठहरी हुई नदियों...

माया एंजेलो की कविता ‘उदित हूँ मैं’

माया एंजेलो की कविता 'And Still I Rise' का अनुवाद कड़वे छली मृषा से इतिहास में तुम्हारे तुम्हारी लेखनी से मैं न्यूनतम दिखूँगी धूल-धूसरित भी कर सकते...

मुसलमानों की गली

आज वह शहर की उस गली में गया जहाँ जाने से लोग अक्सर कतराते हैं पान की गुमटी में बैठी एक बुढ़िया पढ़ रही है उर्दू की...

मेरे पुरखे किसान थे

मेरे पुरखे किसान थे मैं किसान नहीं हूँ मेरी देह से खेत की मिट्टी की कोई आदिम गन्ध नहीं आती पर मेरे मन के किसी पवित्र स्थान पर सभी पुरखे जड़...

तुम्हारे कंधे से उगेगा सूरज

तुम्हारी आँखें मखमल में लपेटकर रखे गए शालिग्राम की मूरत हैं और मेरी दृष्टि शोरूम के बाहर खड़े खिलौना निहारते किसी ग़रीब बच्चे की मजबूरी मैंने जब-जब तुम्हें देखा ईश्वर अपने अन्याय...

बहनें

कोयला हो चुकी हैं हम बहनों ने कहा रेत में धँसते हुए ढक दो अब हमें चाहे हम रुकती हैं यहाँ तुम जाओ बहनें दिन को...

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से पढ़ी है ये इबारत दरमियाँ से यहाँ जो है तनफ़्फ़ुस ही में गुम है परिंदे उड़ रहे हैं शाख़-ए-जाँ से मकान-ओ-लामकाँ के...

मेरी आवाज़, भेद का भाव

मेरी आवाज़ बचपन से कोशिश जारी है पर अब तक पहाड़ के पार मेरी आवाज़ नहीं जाती पहले गूँजती थी और लम्बी यात्रा कर टकराकर लौट आती थी पहाड़ के इस...

आदमी का गाँव

हर आदमी के अन्दर एक गाँव होता है जो शहर नहीं होना चाहता बाहर का भागता हुआ शहर अन्दर के गाँव को बेढंगी से छूता रहता है जैसे उसने...
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