किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री
सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया
एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
लगभग विशेषण हो चुका शासक
किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं
हत्याओं के लिए तर्क
'एक अहिंसा है
जिसका सिक्का लिए
गांधीजी हर शहर में खड़े हैं
लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
किसान को कौन जानता है?
हवा को जितना जानता है पानी
कोई नहीं जानता
पानी को जितना जानती है आग
कोई नहीं जानता
आग को जितना जानते हैं पेड़
कोई नहीं जानता
पेड़ को जितना...
सवा सेर गेहूँ
किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल...
'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
अनुत्तरित प्रार्थना
'परिवर्तन प्रकृति का नियम है'
यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त
मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की
स्थिरता की कामना
प्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः
इस बार उन्हें नहीं था मोह
स्वर्ण-मृग का
फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँ
वे पढ़ीं, आगे बढ़ीं
लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर
रावण से जा भिड़ीं
गूँजते आए थे स्वर
नेपथ्य...
शर्मिष्ठा: पौराणिक अन्याय के विरुद्ध एक आवाज़
किताब: शर्मिष्ठा - कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी
लेखिका: अणुशक्ति सिंह
प्रकाशक: वाणी प्रकाशन
टिप्पणी: देवेश पथ सारिया
इंटरनेट ने पढ़ने के नये विकल्प खोले हैं। मेरे जैसे...
आज तो मन अनमना
आज तो मन अनमना गाता नहीं
ख़ुद बहल औरों को बहलाता नहीं
आदमी मिलना बहुत मुश्किल हुआ
और मिलता है तो रह पाता नहीं
ग़लतियों पर ग़लतियाँ करते...
दुन्या मिखाइल की कविताएँ ‘मोची’ और ‘घूमना’
कविताएँ: दुन्या मिखाइल (Dunya Mikhail)
अनुवाद: आदर्श भूषण
मोची (Shoemaker)
एक कुशल मोची
अपने पूरे जीवनकाल में
न जाने कितने क़िस्म के पैरों के लिए
चमड़े चमकाता है और
कीलें ठोकता...
साक्षात्कार
दो लड़कियों का प्रेम
धरने का पर्यायवाची था
आलिंगन में चिपकी उनकी देहों के मध्य
तैनात था
पृथ्वी के एक गोलार्द्ध का अंधकार
वे जहाँ गईं
उनका प्रेम रिसा
समाज की...

















