रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़ मर न जाओ

कविता: रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़ मर न जाओ ('You Start Dying Slowly') कवयित्री: मार्था मेदेरुस (Martha Medeiros) अनुवाद: असना बद्र तो रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़...

मुझे मत दिखाना अपनी दया

'On Aging', a poem by Maya Angelou, from 'And Still I Rise' अनुवाद: अनुराग तिवारी जब तुम मुझे ऐसे शांत बैठे देखोगे जैसे अलमारी में छूटा कोई...

लिखो, मैं मियाँ हूँ!

'मियाँ पोएट्री' असम में मुसलमान कवियों के द्वारा 'मिया' बोली में लिखी गयी कविताएँ हैं, जो उनके साथ होते आए सामाजिक भेदभाव को दर्ज करती...

मैं

'I Am A Fountain, You Are my Water' - Zeynep Hatun अनुवाद: उपमा 'ऋचा' मैं झरना हूँ, तुम पानी हो मेरा, मैं बहता हूँ तुम से तुम...

अँधेरे से उजाले की सिम्त

मूल रचना: 'अँधेरे से उजाले की ओर' -  अनुराधा अनन्या रूपान्तरण: असना बद्र मुँह अँधेरे घर के सारे काम करके दूर के स्कूल जाती बच्चियाँ धूप में तपता हुआ...

जबानों का आपस में रिश्ता

"जो कौमें आज दूर-दूर के मुल्कों में रहती हैं और भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलती हैं, वे सब किसी जमाने में एक ही बड़े खानदान की रही होंगी।"

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी ‘द विक्ट्री’

"मैं अजीता हूँ कवि.... राजा ने न्याय नहीं किया, किन्तु मेरे कवि वो तुम थे, जिसने आज की चुनौती जीती और देखो, मैं तुम्हें तुम्हारी विजय का पुरस्कार देने आयी हूँ..."

अंधेर नगरी

एक पर्वतारोही एक दुर्घटना के बाद एक ऐसे नगरी में पहुँच जाता है जहाँ सभी लोग अंधे हैं और आँख और दृश्य जैसी कोई चीज़ होती है, नहीं जानते। वहाँ रहने के बाद वह निश्चय करता है कि वह उन लोगों को 'दृष्टि' से अवगत कराएगा। लेकिन क्या वह ऐसा कर पाता है? पढ़िए एच. जी. वेल्स की इस उम्दा कहानी में! अनुवाद उपमा 'ऋचा' द्वारा!

एल्विस फ़्लोरिडा बार्बर कॉलेज के पास मरा था

"दस बरस की उम्र में, मैं यह समझ नहीं पाता था कि एल्विस प्रेस्ली में ऐसा क्या था, जो हम बाक़ी लड़कों में नहीं! मेरा मतलब, उसके पास भी हम सबकी तरह एक सिर, दो हाथ और दो पैर थे। फिर उसमें ऐसा क्या छिपा था कि अनाथालय की तमाम हमउम्र लड़कियाँ उसकी उंगलियों पर नाचने को तैयार रहती थीं!"

आदमियों की कौमें और जबानें

"संस्कृत में आर्य शब्द का अर्थ है शरीफ आदमी या ऊँचे कुल का आदमी। संस्कृत आर्यों की एक जबान थी इसलिए इससे मालूम होता है कि वे लोग अपने को बहुत शरीफ और खानदानी समझते थे। ऐसा मालूम होता है कि वे लोग भी आजकल के आदमियों की ही तरह शेखीबाज थे।"

ऐब-बीनों से

अब्दुल्ला पाशा मौजूदा दौर के विख्यात कुर्दी कवियों में से एक हैं। इनका जन्म 1946 में दक्षिणी कुर्दिस्तान में हुआ था। इन्होंने 'सोवियत संघ'...

इक़रारनामा

'The Contract' - Abdulla Pashew अँग्रेज़ी से अनुवाद: कुशाग्र अद्वैत अब्दुल्ला पाशा मौजूदा दौर के विख्यात कुर्दी कवियों में से एक हैं। इनका जन्म 1946 में...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)