एरिश फ़्रीड की कविता ‘यह जो है’

Poem: 'What It Is' - Erich Fried अनुवाद: पुनीत कुसुम यह बकवास है तर्क कहता है जो है, सो है कहता है प्रेम यह आपदा है आकलन कहता है यह दर्द के सिवा...

मैं तुम्हें तुम्हारी गन्ध से जानता हूँ

रिकार्डो अलैक्जो का जन्म 1960 में मिनास गेराइस के बेलो होरीज़ोंटे में हुआ था। रिकार्डो अपनी समाज और दृश्यपरक कविताओं के लिए विख्यात हैं...

तरह-तरह की कौमें क्योंकर बनीं

"रंग से आदमी की लियाकत, भलमनसी या खूबसूरती पर कोई असर नहीं पड़ता।"

तादेऊष रूज़ेविच की कविता ‘गवाह’

'Witness', a poem by Tadeusz Różewicz अनुवाद: पुनीत कुसुम मेरे दोस्त, तुम जानते हो मैं अन्दर हूँ लेकिन यूँ अचानक मत घुस आओ मेरे कमरे में सम्भव है...

माया एंजेलो की कविता ‘सीख’

'The Lesson', a poem by Maya Angelou अनुवाद: पुनीत कुसुम मैं बार-बार मरती हूँ, नसें सिकुड़ती हैं, खुलती हैं जैसे सोते हुए बच्चों की छोटी-छोटी मुट्ठियाँ, जीर्ण क़ब्रों, सड़े-गले हाड़-माँस,...

‘कैक्टस’ – शिव कुमार बटालवी

अनुवाद: ₹anjita S. Soze द्वारा किए गए अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित   यूँ ही किसी वीराने में उगा कैक्टस या फिर पहाड़ों पर छम से बरस जाने वाला आवारा बादल किसी पीर...

शुरू के आदमी

"मैंने अपने पिछले खत में लिखा था कि आदमी और जानवर में सिर्फ अक्ल का फर्क है। अक्ल ने आदमी को उन बड़े-बड़े जानवरों से ज्यादा चालाक और मजबूत बना दिया जो मामूली तौर पर उसे नष्ट कर डालते।"

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘अप्रत्यक्ष कविता’

'Hidden Poem' - Naomi Shihab Nye अनुवाद: पुनीत कुसुम यदि फ़र्न के पौधे को तुम रख दो एक पत्थर के नीचे अगले दिन वह लगभग ग़ायब हो...

विश्व साहित्यकारों के कुछ चुनिंदा उद्धरण

"उसका हाथ थामना ऐसा था जैसे किसी तितली को पकड़ना या फिर धड़कनों को थाम लेना सम्पूर्ण और जीवंत..." - रेनबो रॉवेल   "उंगली पर गिने जा सके...

कदम्ब

'Summer in Calcutta : Radha-Krishna' - Kamla Das अनुवाद: ₹anjita यह नदी, यह पुराना कदम्ब आज, इसी क्षण से हमारा और सिर्फ हमारा होगा हमारी भौतिक उपस्थिति के ऐलान...

नेरूदा के सवालों से बातें – IV

अनुवाद: पुनीत कुसुम स्वर्ग में, एक गिरिजाघर है हर एक उम्मीद के लिए और हर उस उम्मीद के लिए जो अधूरी रही, एक गिरिजाघर है शार्क नहीं करती...

सवालों की किताब – IV

अनुवाद: पुनीत कुसुम कितने गिरिजाघर हैं स्वर्ग में? शार्क मछली क्यों नहीं करती आक्रमण निर्लज्ज जलपरियों पर? क्या धुंध करती है बातें बादलों से? क्या यह सच है कि...
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