किताब अंश: ‘जया गंगा’ – विजय सिंह

प्रख्यात लेखक, फ़िल्मकार और पटकथा लेखक विजय सिंह का बहुप्रशंसित उपन्यास 'जया गंगा' राजकमल प्रकाशन से हिन्दी में प्रकाशित हुआ है। अंग्रेज़ी और फ़्रेंच...

यहाँ आकाश है

जब तक देखा नहीं तब तक कहाँ था आकाश? कल देखूँगा नहीं तब कहाँ होगा आकाश आकाश है यहाँ यहाँ मैं देख रहा हूँ मेरे देख लेने से वह आकाश हुआ हुई एक...

मृदुला गर्ग – ‘चित्तकोबरा’

मृदुला गर्ग के उपन्यास 'चित्तकोबरा' से उद्धरण | Quotes from 'Chittakobra', a novel by Mridula Garg चयन: विक्रांत (शब्द अंतिम) "जो मन में हो, उसे छिपाना...

कम्पाउण्डर

लोग जहाँ खेतों में खप जाते हैं शहर से चली हुई बिजली जिनके यहाँ तक आते-आते बीच में ही कहीं किसी खम्भे पर दम तोड़ देती है ज़रूरत...

निकानोर पार्रा की कविताएँ (दो)

आख़िरी प्याला इस बात को पसन्द करो या मत करो हमारे पास गिनती के तीन विकल्प होते हैं— भूतकाल, वर्तमान और भविष्य और दरअसल तीन भी नहीं क्योंकि दार्शनिक...

ख़ून

उनका इन्तक़ाल अचानक हुआ था। उन दिनों अपने फ़्लैट में वे अकेले थे। बीवी बेटे के पास कनाडा गई हुई थीं। फ़्लैट में उनके अलावा...

किताब अंश: ‘साधारण लोग, असाधारण शिक्षक’ – एस. गिरिधर

सरकारी स्कूल असल मायने में 'पब्लिक स्कूल' हैं। ये हर व्यक्ति के और हर जगह काम आते हैं—इसमें सबसे पिछड़े इलाक़ों के सबसे ज़्यादा...

गिलहरी

1 भाषाओं में नहीं थीं जगहें न ही था इतना धैर्य कि एक भागते हुए मन को आवाज़ देकर हौले-से रोक लें बुला लें पास जिसमें न संदेह...

जब मैं आया था

जब मैं आया था तेज़ क़दम झुके माथे के बावजूद संकरी गलियों और चौड़े रास्तों पर लम्बी-रुलाइयों के अलावा सिसकना भी सुनायी दे जाता था कमज़ोर आवाज़...

‘पहली बूँद नीली थी’ : सहज, सौम्य कविताओं का कोलाज

'पहली बूँद नीली थी' सोनू यशराज का पहला कविता संग्रह है। इस संग्रह में कवयित्री की काव्य यात्रा और क्रमागत विकास देखा जा सकता...

ओ निशा!

ओ निशा! अब तो तमस् को पात्र में भरकर उड़ेलो और जो तारा-गणों की मालिका सजती तुम्हारे कण्ठ पर, उसको उतारो मालिका से ना रहे अब मोह...

अपनी ही अन्यत्रता

मैं भाग रही हूँ। बाहर अँधेरा हो गया मेरे रास्तों पर पर अन्दर अब तक रोशनी नहीं हुई। स्मृति में दबी हुई आग को अलग कर रही हैं टूटी हुई टहनियों की तरह उँगलियाँ और ठण्डी...
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