अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत ख़ुद से ख़ुद को छिपाती है। होंठों के बीच क़ैद पड़ी हँसी को खींचकर जबरन हँसती है और हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है... अकेली औरत...

चुका भी हूँ मैं नहीं

चुका भी हूँ मैं नहीं कहाँ किया मैनें प्रेम अभी। जब करूँगा प्रेम पिघल उठेंगे युगों के भूधर उफन उठेंगे सात सागर। किन्तु मैं हूँ मौन आज कहाँ सजे मैनें साज अभी। सरल से भी...

मिलेना को लिखे काफ़्का के पत्रों के कुछ अंश

किताब अंश: 'लेटर्स टू मिलेना' अनुवाद: लाखन सिंह प्रिय मिलेना, काश! ऐसा हो कि दुनिया कल ख़त्म हो जाए। तब मैं अगली ही ट्रेन पकड़, वियना में...

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकना इसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा। मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...

मंटो

मंटो के मुताल्लिक़ अब तक बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। उसके हक़ में कम और ‎ख़िलाफ़ ज़्यादा। ये तहरीरें अगर पेश-ए-नज़र...

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगा ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...

इन स्मृतियों को सहेज लो

"इन स्मृतियों को सहेज लो, एक दिन ये कहीं अधिक दीप्त होंगी" इतना ही कहा था तुमने और मुझे वक़्त की बेरहमी का अंदाज़ा हो गया इसलिए जितना...

भरोसा

उन्होंने ही किया सर्वाधिक दोहन भरोसे का जिनकी शिराओं में सभ्यताओं की रसोई का नमक घुला था पुरखों की कही ये सूक्ति स्मरण करती हूँ बार-बार पर...

मेहतम शिफ़ेरा की कविता ‘धूल एवं अस्थियाँ’

मेहतम शिफ़ेरा (Mahtem Shiferraw) इथियोपिया और इरिट्रिया की एक लेखक और दृश्य कलाकार हैं। वह Your Body Is War (यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का, 2019) और...

‘अलगोज़े की धुन पर’ : प्रेम के परिपक्व रंगों की कहानियाँ

किताब: 'अलगोज़े की धुन पर' लेखिका: दिव्या विजय टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अभी किण्डल पर दिव्या विजय का पहला कहानी संग्रह 'अलगोज़े की धुन पर' पढ़कर समाप्त...
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