तुम्हें सौंपता हूँ
फूल मेरे जीवन में आ रहे हैं
सौरभ से दसों दिशाएँ
भरी हुई हैं
मेरी जी विह्वल है
मैं किससे क्या कहूँ
आओ,
अच्छे आए समीर,
ज़रा ठहरो
फूल जो पसंद हों,...
कविताएँ: मार्च 2021
कम नहीं है
तुम्हारे अगले दाँतों के बीच में फाँक है
पर्याप्त है उतनी जगह
फलने को
जो हमारे बीच है
आकाश-भर की इच्छाएँ नहीं
एक पेड़ की चाहत है
जो...
एक ही दृश्य में खोए हुए दो लोग
एक ही दृश्य में खोए हुए दो लोग
कुछ पल के लिए अदृश्य हो जाना चाहते थे
दुनिया के लिए
उस अकेले दृश्य में
बींध दिए जाने के स्वप्न...
किताब अंश: ‘बिसात पर जुगनू’ – वंदना राग
लेखिका वन्दना राग का उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ सदियों और सरहदों के आर-पार की कहानी है। हिंदुस्तान की पहली जंगे-आज़ादी के लगभग डेढ़ दशक...
इंस्टा डायरी: उदास शहर की बातें
जाड़े की सर्दी में खुरदरी दीवार से सटकर रात बिताती मन की नंगी पीठ। अलकतरे से भी ज़्यादा काली रात में काली बिल्ली की...
वही तो नहीं रहने देगा
कविता संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' से
प्रेम वही तो नहीं रहने देगा
उसके शरीर की लय को,
उसके लावण्य की आभा को
उसके नेत्रों के क्षितिज ताकते एकान्त...
स्त्री से बात
स्त्री से बात करने के लिए
निश्चित तौर पर
तुम में होना चाहिए सलीक़ा
फिर सीखो
उसे सुनते जाना
उसकी चुप्पी के आयाम तक
कभी आज़माओ
ख़ुद भी बातें बनाना
कभी चुप...
इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए
इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए
जुर्मों को ठीक तोले
ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले
मुजरिम से भी ज़ियादा
मुंसिफ़ ने ज़ुल्म ढाया
कीं पेश...
क्योंकि मैं
क्योंकि मैं
यह नहीं कह सकता
कि मुझे उस आदमी से कुछ नहीं है
जिसकी आँखों के आगे
उसकी लम्बी भूख से बढ़ी हुई तिल्ली
एक गहरी मटमैली पीली...
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की
कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने
बात तो सच है मगर...
ओरहान वेली की दो कविताएँ
कविताएँ: ओरहान वेली
अनुवाद: देवेश पथ सारिया
मेरी पूर्व पत्नी
हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो
हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता...

















