चींटी और मास्क वाले चेहरे
स्वप्न में दिखती है एक चींटी और मास्क वाले चेहरे
चींटी रेंगती है पृथ्वी की नाल के भीतर
मास्क वाले चेहरे घूमते हैं भीड़ में
सर से...
जीवन सपना था, प्रेम का मौन
जीवन सपना था
आँखें सपनों में रहीं
और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से
यूँ रची हमने अपनी दुनिया
जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ
हमारा दुहराया...
फ़र्क़ नहीं पड़ता
हर बार लौटकर
जब अन्दर प्रवेश करता हूँ
मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'
ईश्वर
यह कैसा चमत्कार है
मैं कहीं भी जाऊँ
फिर लौट आता हूँ
सड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
वह मेरे बिना साथ है
वह उदासी में
अपनी उदासी छिपाए है
फ़ासला सर झुकाए मेरे और उसके बीच
चल रहा है
उसका चेहरा
ऐंठी हुई हँसी के जड़वत् आकार में
दरका है
उसकी आँखें बाहर...
नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’
नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
कितने प्रस्थान
सूरज
अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया
दिन-भर का चढ़ना
उतरते हुए दृश्य को
सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है
यह संदेहयुक्त है
अस्त होने की परिभाषा में
कितना अस्त हो जाना
दोबारा...
कविताएँ: नवम्बर 2021
यात्री
भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है?
इसका एक ही जवाब है मेरे पास
कि तुम्हारे होने के भ्रम ने
मुझे ज़िन्दा रखा
तुम्हारे होने के भ्रम में
मैंने शहर...
हारुकी मुराकामी की कहानी ‘सातवाँ आदमी’
कहानी: 'सातवाँ आदमी'
लेखक: हारुकी मुराकामी
जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन
हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह
"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
आशिका शिवांगी सिंह की कविताएँ
माँ-पिता प्रेमी-प्रेमिका नहीं बन सके
मेरी माँ जब भी कहती है—
"प्रेम विवाह ज़्यादा दिन नहीं चलते, टूट जाते हैं"
तब अकस्मात ही मुझे याद आने लगते...

















