किताब अंश: ‘जीते जी इलाहाबाद’
'जीते जी इलाहाबाद' ममता कालिया की एक संस्मरणात्मक कृति है, जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिन्दी साहित्य...
राहुल सांकृत्यायन – ‘तुम्हारी क्षय’
राहुल सांकृत्यायन की किताब 'तुम्हारी क्षय' से उद्धरण | Quotes from 'Tumhari Kshya', a book by Rahul Sankrityayan
चयन: पुनीत कुसुम
"उन्हीं के ख़ून से मोटी...
तुम्हारी जोंकों की क्षय
जोंकें? — जो अपनी परवरिश के लिए धरती पर मेहनत का सहारा नहीं लेतीं। वे दूसरों के अर्जित ख़ून पर गुज़र करती हैं। मानुषी...
कविताएँ: सितम्बर 2021
हादसा
मेरे साथ
प्रेम कम
उसकी स्मृतियाँ ज़्यादा रहीं
प्रेम
जिसका अन्त
मुझ पर एक हादसे की तरह बीता
मुझे उस हादसे पर भी प्रेम आता है।
गंध
मैं तुम्हें याद करता हूँ
दुनिया...
कुछ दूर चलते ही
घर में आख़िरी रात। समान लगाने की प्रक्रिया में भावनाओं को रोकना एक मुश्किल काम है। भावनाएँ जो इतने दिन दिल्ली में रहने से...
‘एक देश बारह दुनिया’ : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर
पुस्तक: 'एक देश बारह दुनिया : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर'
लेखक: शिरीष खरे
प्रकाशक: राजपाल एण्ड संस
समीक्षा/टिप्पणी: आलोक कुमार मिश्रा
संविधान में लिखा है— 'इंडिया...
भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं
'भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं' : प्रमोद रंजन से पंकज पुष्कर की बातचीत
पंकज पुष्कर: जन्म से लेकर अब तक आपकी...
समीक्षा: ‘एक बटा दो’
किताब: 'एक बटा दो'
लेखिका: सुजाता
प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
समीक्षा/टिप्पणी: महेश कुमार
स्त्री निर्मिति की विभिन्न चरणों की पड़ताल करके उससे बाहर निकलने का स्त्रीवादी विश्लेषण है 'एक...
ऊँचाई है कि
मैं वह ऊँचा नहीं जो मात्र ऊँचाई पर होता है
कवि हूँ और पतन के अन्तिम बिन्दु तक पीछा करता हूँ
हर ऊँचाई पर दबी दिखती...
इन्तिज़ार हुसैन की कहानी ‘चूहेदानी’
मूल कहानी: इंतिज़ार हुसैन
अंग्रेज़ी से अनुवाद: उपमा 'ऋचा'
भूमिका: सस्ते चावलों ने यहाँ ऐसी क़यामत बरपायी कि पूछिए ही मत। हाँ जनाब, क़यामत यानी चूहे......

















