कमला दास की कविता ‘परिचय’

मूल कविता: 'An Introduction' कवयित्री: कमला दास भावानुवाद: दिव्या श्री मैं राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानती लेकिन उन नामों को जानती हूँ जो सत्ता के शिखर पर...

चन्दन पाण्डेय – ‘वैधानिक गल्प’

चन्दन पाण्डेय के उपन्यास 'वैधानिक गल्प' से उद्धरण | Quotes from Vaidhanik Galp ('Legal Fiction' in English), a novel by Chandan Pandey "ख़ुद मुझे भी...

यह किताब क्या है, क्यों है? (किताब अंश: ‘आइडिया से परदे...

रामकुमार सिंह और सत्यांशु सिंह की यह किताब 'आइडिया से परदे तक' सिनेमा के एक सहयोगी पेशेवर के रूप में फ़िल्म-लेखक के काम-काज का...

महेंद्र कुमार वाक़िफ़ की कविताएँ

मेरी निजता की परिधि में तुम अमावस का चाँद छुपता है गहरे सागर में नींद अंगड़ाइयों में छुप जाती है प्रेम लड़ता है तमाम प्रतिबन्धों से और हारकर छुप...

मैं बहुत क्लान्त हूँ

बादल सरकार के नाटक 'एवम् इन्द्रजित्' का भारतीय रंगकर्म में एक विशिष्ट स्थान है। मूलतः बांग्ला में लिखे इस नाटक का अनेक भारतीय भाषाओं...

मध्यरात्रि

मध्यरात्रि में आवाज़ आती है 'तुम जीवित हो?' मध्यरात्रि में बजता है पीपल ज़ोर-ज़ोर से घिराता-डराता हुआ पतझड़ के करोड़ों पत्ते मध्यरात्रि में उड़ते चले आते हैं नींद की...

एदुआर्दो गालेआनो की चुनी हुई रचनाएँ (‘आग की यादें’ से)

किताब: 'आग की यादें' प्रकाशक: गार्गी प्रकाशन सम्पादक: रेयाज़ुल हक़ अनुवाद : पी. कुमार मंगलम चयन एवं प्रस्तुति : आमिर साइकिल साइकिलों ने दुनिया में औरतों को आज़ाद करने में...

ख़तरनाक दुःख

मेरा दुःख नितान्त मेरा था जो कुछ-कुछ मेरी माँ या उनके जैसी तमाम औरतों के दुःख-सा ग़ैर-ज़रूरी मगर ख़तरनाक घोषित था जिन्हें घर-गृहस्थी में फँस, न जीने की फ़ुर्सत थी न मरने की। जिनके...

विजय सिंह – ‘जया गंगा’

विजय सिंह के उपन्यास 'जया गंगा' से उद्धरण | Quotes from 'Jaya Ganga', a novel by Vijay Singh चयन: पुनीत कुसुम "ज़िन्दगी में कुछ ऐसे कलात्मक...

कविताएँ: जुलाई 2021

लौट आओ तुम तुम रहती थीं आकाश में बादलों के बीच तारों के संग चाँद के भीतर खुली धूप में हरी घास में फूलों में झरते हरसिंगार में गौरैयों की आवाज़ में कोयल की मीठी...

बचपन में दुपहरी थी, बरगद देखता है

बचपन में दुपहरी थी एक पेड़ था एक चिड़िया थी एक तालाब था तीनों गाँव में थे चिड़िया गाती थी चिड़िया पेड़ में थी पेड़ था तालाब में तालाब दुपहरी में था दुपहरी...

किताब अंश: ‘कलम का सिपाही’ (प्रेमचंद की जीवनी) – अमृतराय

'कलम का सिपाही' प्रेमचन्द की पहली मुकम्मल जीवनी है जो जीवनी साहित्य में क्लासिक का दर्जा पा चुकी है। अमृतराय की लिखी इस किताब...
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