प्रेम-पथ हो न सूना
प्रेम-पथ हो न सूना कभी, इसलिए
जिस जगह मैं थकूँ, उस जगह तुम चलो।
क़ब्र-सी मौन धरती पड़ी पाँव पर
शीश पर है कफ़न-सा घिरा आसमाँ,
मौत की...
प्रेम मेरे लिए
मैं नहीं मानता उसे प्रेम
जिसमें एक व्यक्ति को नसीब हो रसातल
दूसरे को मिले उन्मुक्त आकाश,
इसे नहीं कहा जा सकता इंसाफ़।
'दोनों में बराबर बँटें दुःख'
यह...
प्रेम करती स्त्री
प्रेम करती स्त्री देखती है
एक सपना रोज़
जागने पर सोचती है क्या था वह
निकालने बैठती है अर्थ
दिखती हैं उसे आमफ़हम चीज़ें
कोई रेतीली जगह
लगातार बहता नल
उसका...
ठहरिए, मैं कुछ कहना चाहता हूँ
1
कुछ दिन पहले की बात है
आँखों के सामने का दृश्य
धूमिल होता गया
और भरभराते हुए
मेरा जिस्म लुढ़क गया
मुझे मेरे दोस्त ने सम्भाला
होश आने के बाद
उसकी...
किताब अंश: ‘मुर्दहिया’ – डॉ॰ तुलसीराम
मुर्दहिया डॉ॰ तुलसीराम की आत्मकथा है। 'मुर्दहिया' अनूठी साहित्यिक कृति होने के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के दलितों की जीवन स्थितियों तथा इस क्षेत्र...
मन्नू भण्डारी – ‘महाभोज’
मन्नू भण्डारी के उपन्यास 'महाभोज' से उद्धरण | Quotes from 'Mahabhoj', a novel by Mannu Bhandari
चयन व प्रस्तुति: पुनीत कुसुम
"अपने व्यक्तिगत दुख-दर्द, अंतर्द्वंद्व या...
हरिराम मीणा की क्षणिकाएँ – II
1
ठर्रा के पलीता ने
आग लगा दी ग़ुस्से की भट्टी में
मज़दूर ने पहली बार ज़ुबान खोली
'पल-पल का हिसाब लूँगा हरामियों से।'
2
लोकतंत्र में एक जम्बूरा ठोकतंत्र...
ब्रह्म-मुहूर्त
एक वे थीं कि जाग रहीं सदियों से
उनकी नींदों में घुला था तारा भोर का
आद्रा नक्षत्र की बाँह थामे
दिन आरम्भ होता उनके अभ्यस्त हाथों से
फिर...

















