लघु कविताएँ
Poems: Nutan Gupta
समय-बोध
अश्वारूढ़ होकर
चलने का तात्पर्य
यह कभी नहीं है
कि तुम्हें
ठोकर लग ही नहीं सकती,
वायु वेग से चलने वाले
अश्व भी कभी-कभी
धड़ाम हो जाते हैं।
अतिरेक
मैंने ऐसे...
शब्द और मौन
'Shabd Aur Maun', Short Hindi Poems by Harshita Panchariya
बचाकर रखिए अपने शब्दों को
इसलिए नहीं कि
शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते
बल्कि इसलिए
कि शब्दों से
लम्बी लोगों की...
क्षणिकाएँ: ‘प्रेम’
Short Poems on Love by Harshita Panchariya
1
मेरा प्रेम तुम्हारे लिए बिल्कुल
उस बीज के जैसा है
जिसे रोशनी से डर लगता है।
हमारा प्रेम पनप जाए,
इसलिए उसे...
अभिलाषा, पहचान, युद्ध
Poems: Harshita Panchariya
अभिलाषा
माँगो तो मनोकामनाओं
के अंतिम अध्याय में
अपूर्ण रहने का वर माँग लेना
क्योंकि
अनेक सम्भावनाओं
का ठौर इतना सहज कहाँ?
पहचान
पहचानी जाऊँगी तो
संसार की उस मूर्ख स्त्री...
‘हिन्दुस्तान’ और ‘शहर’ – दो क्षणिकाएँ
हिन्दुस्तान
धूर्तों को नारा
मूर्खों को चारा
सारे जहाँ से अच्छा
यह हिन्दुस्तान हमारा।
शहर
हर किसी को
मुफ़्त में
बाँटता रहा
अकेलेपन का ज़हर
यह
भीड़ भरा
शहर।
कुछ लघु काव्य
रूपान्तर: नामदेव
1
एकलव्य की
गुरु-दक्षिणा:
लटका दो— सर
द्रोणाचार्य का
युगों तक!
2
दर्द ने
मेरा सीना चीरकर
मौत को टाल दिया!
3
सिन्धु!
तेरे सीने पर
छोड़े हैं पद-चिह्न
अपनी तहज़ीब के!
4
सूर्य को जब
हथेली से न ढाँक...











