क्षणिकाएँ

नक़्शे भूगोल की कक्षा में अव्वल आई लड़की, बनाती है नक़्शे कई देशों के और उन्हें तवे पर सेक देती है। चाहतें औरत ढूँढ रही है साथ देने वाला आदमी उस समाज में जहाँ आदमी सिर्फ़...

लघु कविताएँ

Poems: Nutan Gupta समय-बोध अश्वारूढ़ होकर चलने का तात्पर्य यह कभी नहीं है कि तुम्हें ठोकर लग ही नहीं सकती, वायु वेग से चलने वाले अश्व भी कभी-कभी धड़ाम हो जाते हैं। अतिरेक मैंने ऐसे...

शब्द और मौन

'Shabd Aur Maun', Short Hindi Poems by Harshita Panchariya बचाकर रखिए अपने शब्दों को इसलिए नहीं कि शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते बल्कि इसलिए कि शब्दों से लम्बी लोगों की...

क्षणिकाएँ: ‘प्रेम’

Short Poems on Love by Harshita Panchariya 1 मेरा प्रेम तुम्हारे लिए बिल्कुल उस बीज के जैसा है जिसे रोशनी से डर लगता है। हमारा प्रेम पनप जाए, इसलिए उसे...

क्षणिकाएँ

Poems: Harshita Panchariya सहनशीलता उबलते हुए दूध पर ज़रा सी फूँक मारकर खौलने से बचाने वाली औरतें अक्सर बचा लेती है स्त्री जाति का सर्वोत्तम गहना। नव-सृजन सभ्यता के विकास की शृंखला में एक दिन संसार की समस्त स्त्रियों को भाषा में परिवर्तित...

क्षणिकाएँ

प्रेम दो प्रेमी मिले, बिछड़कर फिर मिल गए जैसे कि होंठ 'प्रेम' का उच्चारण करते समय! नींद और ख़्वाब एक-दूसरे से कुछ ही दूर पर खड़े नींद और ख़्वाब लेकिन आज तक न...

अभिलाषा, पहचान, युद्ध

Poems: Harshita Panchariya अभिलाषा माँगो तो मनोकामनाओं के अंतिम अध्याय में अपूर्ण रहने का वर माँग लेना क्योंकि अनेक सम्भावनाओं का ठौर इतना सहज कहाँ? पहचान पहचानी जाऊँगी तो संसार की उस मूर्ख स्त्री...

क्षणिकाएँ

अमलतास हथेली पर रखा अमलतास महकता है, तुम-सा तुमने तो कहा था कि यह मौसमी फूल है और खिलता है मौसम भर महकता भी सिर्फ़ मौसम भर पीला, ख़ूब पीला -...

‘हिन्दुस्तान’ और ‘शहर’ – दो क्षणिकाएँ

हिन्दुस्तान धूर्तों को नारा मूर्खों को चारा सारे जहाँ से अच्छा यह हिन्दुस्तान हमारा। शहर हर किसी को मुफ़्त में बाँटता रहा अकेलेपन का ज़हर यह भीड़ भरा शहर।

लाइटहाउस

अगर होता एक lighthouse उनके लिए, जो भटके हैं, ख़ुद से एक lighthouse अपनी रूह के लिए जो हर रोज़, दिन ढले बता जाता, रास्ता वापसी का... ख़ुद तक!

कुछ लघु काव्य

रूपान्तर: नामदेव 1 एकलव्य की गुरु-दक्षिणा: लटका दो— सर द्रोणाचार्य का युगों तक! 2 दर्द ने मेरा सीना चीरकर मौत को टाल दिया! 3 सिन्धु! तेरे सीने पर छोड़े हैं पद-चिह्न अपनी तहज़ीब के! 4 सूर्य को जब हथेली से न ढाँक...
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