सवालों की किताब – III

अनुवाद: पुनीत कुसुम बताओ मुझे, क्या गुलाब नग्न है या यही उसकी एकमात्र पोशाक है? क्यों छिपाते हैं वृक्ष अपनी जड़ों का वैभव? कौन सुनता है चोर मोटरगाड़ियों के पछतावे? बारिश...

एस्केप

जब भी तुम किसी आदमी को जेल जाते हुए देखो, अपने दिल में सोचना- "शायद वह एक और अधिक सँकरी जेल से भाग रहा है!" और जब भी तुम...

नेरूदा के सवालों से बातें

अनुवाद: पुनीत कुसुम नेरूदा के सवालों से बातें - III नेरूदा के सवालों से बातें - IV

ख़ुद-नफ़्ससाज़ी

अनुवाद: पुर्तगाल के अज़ीम शायर जनाब 'फेरनान्दो पेसोआ' की नज़्म 'ऑटोसाइकोग्राफी' शायर वो आदमी है जो बहाने बनाता है और इतनी शिद्दत से बहाने बनाता है...

गली की तरफ खुलती खिड़की

"कोई भी व्यक्ति जो अकेला जीवन जीता है और फिर भी यदा-कदा कहीं जुड़े रहना चाहता है - वह अधिक समय तक एक ऐसी खिड़की के बगैर नहीं रह पाएगा जो बाहर गली में खुलती हो।"

शुरू का इतिहास कैसे लिखा गया

संसार को जानना और उसके रहस्यों को खंगालना एक बालक मन के लिए वह खेल है जो वास्तव में उनकी समझ को विकसित करने का एक माध्यम भी बनता है। इसी माध्यम के महत्त्व को पहचानते हुए जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बेटी को कुछ पत्र लिखे जिनमें उन्होंने संसार के प्राचीनतम रूप और उस रूप में मानवों के दखल के बारे में बातें की हैं! ये पत्र बच्चों से एक बुनियादी स्तर पर जाकर बातें करते हैं, जिसे हमारी शिक्षा प्रणाली कहीं भूल चुकी है.. पढ़िए और अपने आसपास के बच्चों को पढ़ाइये!

सवालों की किताब – II

अनुवाद: पुनीत कुसुम यदि मैं मर गया हूँ और इस बात से अनजान हूँ तो वक़्त मैं पूछूँ किससे भला? फ्रांस में, बसन्त कहाँ से पा जाता है...

रुथ के लिए

अनुवाद: शमशेर बहादुर सिंह मगन मन पंख झड़ जाते यदि और देखनेवाली आँखें झप जाती हैं शाहीन के अंदर पानी नहीं रहता उस अमृत जल को पी के...

संसार पुस्तक है

एक बच्चे का इस संसार से परिचय कैसे कराना चाहिए, इसे लेकर माता-पिता में शायद हमेशा एक संशय रहता है.. अपने तरीकों को लेकर हम निश्चित नहीं हो पाते. लेकिन जवाहरलाल नेहरू का इंदिरा के नाम यह पत्र एक रास्ता ज़रूर दिखाता है, जिसका अनुसरण माता-पिता और अध्यापक दोनों कर सकते हैं..

जॉन कीट्स

जॉन कीट्स के उद्धरण | John Keats Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम   "मेरी कल्पना एक मठ है और मैं इसका महन्त।"   "इस संसार में कुछ भी...

सोना-जागना

"मेरी जवानी को बरबाद करके तू अब अपने-आप को सँवारती, इठलाती घूमती है। काश! मैंने पैदा होते ही तुझे मार दिया होता।"

एलिफ़ शफ़ाक

एलिफ़ शफ़ाक के उद्धरण | Elif Shafak Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम   "जहाँ प्रेम है, दर्द भी वहाँ होने के लिए बाध्य है।"   "आस्तिक लोग एक...
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