काले भेड़िए के ख़िलाफ़

देखो कि जंगल आज भी उतना ही ख़ूबसूरत है। अपने आशावान हरेपन के साथ बरसात में झूमता हुआ। उस काले भेड़िए के बावजूद जो शिकार की टोह में झाड़ियों से निकलकर...

बेखटके

नींद इतनी कम और जलन इतनी ज़्यादा कि सड़क किनारे सोते कुत्ते को देख भर जाती हूँ जलन से इतनी कमियाँ हैं जीवन में कि पानी के तोड़...

अंश: हम सभी को फ़ेमिनिस्ट होना चाहिए (We Should All Be...

यह अंश यहाँ सुनें: https://youtu.be/KrxOnltCsNk मूल व्याख्यान: हम सभी को फ़ेमिनिस्ट होना चाहिए (We Should All Be Feminists) लेखिका: चिमामाण्डा न्गोज़ी आदीच्ये (Chimamanda Ngozi Adichie) अनुवाद: दिव्याक्षी जिस तरह...

लालबत्ती पर कविता वर्कशॉप

कविता खोजने के गर्दनतोड़ कारोबार में दिल के आकार के लाल गुब्बारों में भी तलाश की जाएगी कविता एक दिन कवि आएँगे सब तरह के सब जगह...

जापानी सराय: विभिन्न ध्रुवों‌ को छूती कहानियाँ

किताब: 'जापानी सराय' लेखिका: अनुकृति उपाध्याय टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अनुकृति उपाध्याय ‌के लेखन के एकाधिक ध्रुव हैं। अनुकृति कभी बिल्कुल विदेशी संस्कृति से रूबरू कराती हैं...

वितानमय

निष्ठुरताओं से घिरा भयभीत मन धैर्य का अभिनय कर रहा है अवमुक्त होने के सन्दर्भ में कुछ स्मृतियाँ, कुछ आशंकाएँ बची हैं आगंतुक पत्र के साथ चपरासी शहर से शहर...

विदा ले चुके अतिथि की स्मृति

मैं विदा ले चुका अतिथि (?) हूँ अब मेरी तिथि अज्ञात नहीं, विस्मृत है। मेरे असमय प्रस्थान की ध्वनि अब भी करती है कोहरे के कान में...

रेनर मारिया रिल्के की तीन कविताएँ

मूल कविताएँ: रेनर मारिया रिल्के अनुवाद: उसामा हमीद दुखड़ा Lament सब कुछ दूर है और बहुत पहले ख़त्म हो चुका है। मुझे लगता है मेरे ऊपर चमकता हुआ तारा करोड़ों बरस पहले...

ताबूत (II)

मैं उस दुकान की तलाश में हूँ जहाँ ताबूत बनते हैं मुझे उस माहिर कारीगर से मिलना है जो सबसे अच्छे ताबूत बनाने के लिए मशहूर है, मुझे...

प्रेमचंद की प्रेम-लीला का उत्तर

कई साल हुए नागरी प्रचारिणी पत्रिका में किसी मराठी लेख के आधार पर एक हिन्दी लेख प्रकाशित हुआ। मुझे वह लेख बहुत अच्छा मालूम...

सुजाता – ‘एक बटा दो’

सुजाता के उपन्यास 'एक बटा दो' से उद्धरण | Quotes from 'Ek Bata Do', a novel by Sujata चयन: पुनीत कुसुम "आवारा होने की चाह नदी...

जॉन डन की कविता ‘मृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम’

कविता: 'मृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम' ('Death, be not proud') कवि: जॉन डन (John Donne) भावानुवाद: दिव्या श्री मृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम हालाँकि कुछ लोगों...
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