जॉन डन की कविता ‘मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ’
कविता: 'मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ' ('Sweetest love, I do not go')
कवि: जॉन डन (John Donne)
भावानुवाद: दिव्या श्री
मेरी प्यारी महबूबा!
मैं इसलिए नहीं जा...
किताब अंश: ‘परियों के बीच’ – रूथ वनिता
रूथ वनिता का उपन्यास 'परियों के बीच' एक ऐसे कोमल अहसास और रिश्ते का संसार हमारे सामने उजागर करता है जिसका वजूद हमेशा से...
अपने को देखना चाहता हूँ
मैं अपने को खाते हुए देखना चाहता हूँ
किस जानवर या परिन्दे की तरह खाता हूँ मैं
मिट्ठू जैसे हरी मिर्च कुतरता है
या बन्दर गड़ाता है...
अमीरी रेखा
मनुष्य होने की परम्परा है कि वह किसी कंधे पर सिर रख देता है
और अपनी पीठ पर टिकने देता है कोई दूसरी पीठ
ऐसा होता...
कहाँ हो तुम
मृत्यु का भय
ईश्वर के भय को सींचता रहता है
ओ मेरे कवि
प्रार्थनाएँ करते-करते सदियों के पंख
झड़ चुके हैं
ऋतुचक्रों पर फफूँद बैठी है
ईश्वर ग़रीबों की तरफ़...
मनोहर श्याम जोशी – ‘कसप’
मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास 'कसप' से उद्धरण | Quotes from 'Kasap', a novel by Manohar Shyam Joshi
प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
चयन: पुनीत कुसुम
मुझे तो समस्त...

















