कविता

Read here famous and latest Hindi poetry and other translated Indian poems by renowned and new poets.

इस पेज पर आप हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं से अनूदित पुराने व नए साहित्यकारों की उत्कृष्ट कविताएँ पढ़ सकते हैं!

कुछ चुनिन्दा कविताएँ / Selections from Hindi Poetry —

‘नक्सलबाड़ी’ – सुदामा पांडेय धूमिल

‘सहमति…
नहीं, यह समकालीन शब्द नहीं है
इसे बालिग़ों के बीच चालू मत करो’    more…

‘सूर्योदय की प्रतीक्षा में’ – कुँवर नारायण

वे सूर्योदय की प्रतीक्षा में
पश्चिम की ओर
मुॅंह करके खड़े थे    more…

‘तुम आयीं’ – केदारनाथ सिंह

तुम आयीं
जैसे छीमियों में धीरे-धीरे
आता है रस,
जैसे चलते-चलते एड़ी में
काँटा जाए धँस    more…

‘देना’ – नवीन सागर

जिसने मेरा घर जलाया
उसे इतना बड़ा घर
देना कि बाहर निकलने को चले
पर निकल न पाए    more…

‘हस्तक्षेप’ – श्रीकांत वर्मा

कितना भी कतराओ
तुम बच नहीं सकते हस्तक्षेप से—
जब कोई नहीं करता
तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ
मुर्दा
यह प्रश्न कर हस्तक्षेप करता है—
मनुष्य क्यों मरता है?    more…

‘यह सब कैसे होता है’ – कुमार विकल

मैंने चाहा था कि मेरी कविताएँ
नन्हें बच्चों की लोरियाँ बन जाएँ
जिन्हें युवा माएँ
शैतान बच्चों को सुलाने के लिए गुनगुनाएँ    more…

‘दीवारें’ – विजयदेव नारायण साही

अजब तरह की है यह कारा
जिसमें केवल दीवारें ही
दीवारें हैं,
अजब तरह के कारावासी,
जिनकी क़िस्मत सिर्फ़ तोड़ना
सिर्फ़ तोड़ना।    more…

‘मरने की फ़ुर्सत’ – अनामिका

ईसा मसीह
औरत नहीं थे
वरना मासिक धर्म
ग्यारह बरस की उमर से
उनको ठिठकाए ही रखता
देवालय के बाहर!    more…

‘ख़रगोश और चीते की तलाश’ – अब्दुल बिस्मिल्लाह

कविता की प्रक्रिया से गुज़रना
फाँसी से मुक्त होने की छटपटाहट से कम नहीं है    more…

‘अब विदा लेता हूँ’ – पाश

और अब हर तरह की कविता से पहले
हथियारों के ख़िलाफ़ युद्ध करना ज़रूरी हो गया है    more…

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मिट्टी का दर्शन

आत्मा अमर और मिट्टी नश्वर यह बिना देखे का दर्शन बिल्कुल झूठा है! आत्मा की अमरता कब, किसने देखी! मिट्टी को, किन्तु, सदैव हमने देखा। मिट्टी में मानवता...

सभी सुख दूर से गुज़रें

सभी सुख दूर से गुज़रें गुज़रते ही चले जाएँ मगर पीड़ा उमर भर साथ चलने को उतारू है! हमको सुखों की आँख से तो बाँचना आता नहीं हमको...

पाँव कटे बिम्ब

घिसटते हैं मूल्य बैसाखियों के सहारे पुराने का टूटना नये का बनना दीखता है—सिर्फ़ डाक-टिकटों पर लोकतंत्र की परिभाषा क्या मोहताज होती है लोक-जीवन के उजास हर्फ़ों की? तो फिर क्यों दीखते...

संजय छीपा की कविताएँ

1 कुरेदता हूँ स्मृतियों की राख कि लौट सकूँ कविता की तरफ़ एक नितान्त ख़ालीपन में उलटता-पलटता हूँ शब्दों को एक सही क्रम में जमाने की करता हूँ कोशिश ज़िन्दगी की बेतरतीबी...

टोनी मोंगे की कविता ‘डेविड’ (माइकलेंजेलो की प्रसिद्ध कलाकृति ‘डेविड’ को...

टोनी मोंगे अमेरिकी नागरिक हैं जो ताइवान में अंग्रेज़ी अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। टोनी का जन्म बॉस्टन में हुआ था और वे...

कविताएँ: जून 2021

सबक़ इस समय ने पढ़ाए हैं हमें कई सबक़ मसलन यही कि शब्दों से ज़्यादा स्पर्श में ताक़त होती है मिलने के अवसर गँवाना भूल नहीं, अपराध है और जीवन से...

हक़ दो

फूल को हक़ दो—वह हवा को प्यार करे ओस, धूप, रंगों से जितना भर सके, भरे सिहरे, काँपे, उभरे और कभी किसी एक अँखुए की आहट पर पंखुड़ी-पंखुड़ी...

जीवन की बात

मैं इस हृदय विदारक समय में केवल जीवन के बारे में सोचता हूँ और उसे मेरी मृत्यु की चिन्ता लगी रहती है जबकि मैंने कई बार कहा भी क्या...

साइकिल सवार

हम साइकिल सवार हैं हम पहिए से राब्ता रखते हैं उसके आविष्कार की मूल भावना के साथ किसी ईंधन ने अभी नहीं लिया है पहिए के उत्साह का...

पंचतत्व (चींटी, तितली, पानी, गिलहरी और दरख़्त)

मेरे दोस्त जब भी चलना तो बाघ की तरह नहीं चलना चलना चींटियों की तरह सबके साथ बिना डरे, बिना थके, बिना रुके, एकदम शान्त—केवल अपने पथ पर जब भी भरो...

स्थगित नहीं होगा शब्द

स्थगित नहीं होगा शब्द— घुप्प अंधेरे में चकाचौंध में बेतहाशा बारिश में चलता रहेगा प्रेम की तरह, प्राचीन मन्दिर में सदियों पहले की व्याप्त प्रार्थना की तरह— स्थगित नहीं होगा शब्द— मौन की...

मैं सरल होना चाहती हूँ

महत्त्वाकाँक्षाओ! चली जाओ जहाँ तुम्हारा मन करे जहाँ तुम्हारे पाँव पड़ें मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती न अभी न आगे कभी मैं नहीं बाँटना चाहती तुमसे अपने सपने अपने सरोकार तुम मुझे समेट...
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